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धान फसल में एजोला अपनाएँ – यूरिया बचाएँ, मिट्टी की सेहत सँवारें, फसल उत्पादन बढ़ाएँ
  • General
  • 2026-08-05 21:44:11
  • सैयद शादाब आलम

धान फसल में एजोला अपनाएँ – यूरिया बचाएँ, मिट्टी की सेहत सँवारें, फसल उत्पादन बढ़ाएँ

जैव उर्वरक एवं हरित खाद के रूप में एजोला जैव उर्वरक का  उपयोग धान की खेती मे किसानों के लिए वरदान


धान की खेती में बढ़ती उत्पादन लागत एवं रासायनिक उर्वरकों पर अधिक निर्भरता को कम करने के उद्देश्य से जिला कृषि पदाधिकारी-सह-परियोजना निदेशक, आत्मा, कटिहार ने किसानों से धान की फसल में एजोला (Azolla) जैव उर्वरक के  उपयोग की अपील की है। एजोला एक प्राकृतिक जैव उर्वरक एवं हरित खाद है, जो वातावरण की नाइट्रोजन को स्थिर कर धान की फसल को उपलब्ध कराता है। इसके नियमित उपयोग से मिट्टी की उर्वराशक्ति में वृद्धि होती है, उत्पादन लागत कम होती है तथा धान की उपज एवं गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होता है।


 एजोला अपनाने से किसानों को होंगे ये प्रमुख लाभ


✅ धान फसल को  प्रति हेक्टेयर लगभग 25–30 किलोग्राम प्राकृतिक नाइट्रोजन की उपलब्धता कराता है। 

✅ रासायनिक नाइट्रोजन (यूरिया) की आवश्यकता 20–25% तक कम होगी।


✅ धान में अधिक कल्ले, बेहतर बढ़वार एवं गहरी हरियाली होगी।

✅ मिट्टी की जैविक उर्वराशक्ति एवं सूक्ष्मजीव गतिविधि में वृद्धि होगी।

✅ खरपतवारों का प्राकृतिकनियंत्रण होगा।

✅ कम लागत में अधिक उत्पादन एवं पर्यावरण संरक्षण होगा।


 वैज्ञानिक प्रयोग विधि


🔹 धान की रोपाई के 7–10 दिन बाद प्रति हेक्टेयर लगभग 300-500 किलोग्राम ताजा एजोला खेत में समान रूप से फैलाएँ।

🔹 खेत में 5–10 सेंटीमीटर पानी बनाए रखें, जिससे एजोला तेजी से पूरे खेत में फैल सके।

🔹 लगभग 15–20 दिनों में एजोला प्राकृतिक रूप से सड़कर  वातावरण से धान की फसल को नाइट्रोजन उपलब्ध कराता है।


किसान भाई  इन सावधानियों का अवश्य रखें ध्यान


---एजोला डालने के तुरंत पहले या बाद में खरपतवारनाशी का प्रयोग न करें।

--खेत में पानी का स्तर स्थिर रखें तथा तेज बहाव से बचाएँ।

--केवल स्वस्थ एवं शुद्ध एजोला कल्चर का उपयोग करें।

--संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाएँ तथा कृषि विभाग की अनुशंसाओं का पालन करें।


जिला कृषि पदाधिकारी-सह-परियोजना निदेशक, आत्मा, कटिहार की किसान भाईयो से अपील


"एजोला एक सस्ती, टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल जैव उर्वरक है। किसान भाई धान की खेती में इसका अधिकाधिक प्रयोग करें, इसके प्रयोग से खेती मे रासायनिक उर्वरकों जैसे यूरिया पर निर्भरता कम होगी, मिट्टी की उर्वराशक्ति बढ़ेगी और अधिक उत्पादन के साथ बेहतर आय प्राप्त हो सकेगा।"

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