« कटिहार में अंबेडकर जयंती पर एकजुटता की ताकत, भव्य शोभायात्रा से गूंजा संविधान बचाओ का नारा « बाबासाहेब के रास्ते पर चलकर ही बनेगा समरस समाज- सांसद तारिक अनवर « हिमंत बिस्वा सरमा के बयान पर भड़के पूर्व विधायक शकील अहमद खान, कहा– दलित समाज का अपमान बर्दाश्त नहीं « नरैहिया में डिग्री कॉलेज की मांग तेज, नहीं बना तो आंदोलन की चेतावनी सबहेड « कटिहार में 49 वर्षीय महिला रहस्यमय तरीके से लापता, परिजनों ने मुफस्सिल थाना में दिया आवेदन। « रोजीतपुर हाईवे पर भीषण सड़क हादसा: ट्रक-बाइक टक्कर में तीन युवकों की मौके पर मौत, चालक फरार « कटिहार कृषि विज्ञान केंद्र में दो दिवसीय कार्यशाला संपन्न, किसानों की आय बढ़ाने पर जोर « जाफरगंज में SBI संजीवनी परियोजना के तहत चला स्वच्छ भारत अभियान, ग्रामीणों ने लिया स्वच्छता का संकल्प « कटिहार के चार विद्यालयों में 400 बच्चों को मिला न्यूट्रिशन व हाइजिन किट, सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन भी लगाई गई « नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई: प्रतिबंधित कोरेक्स कफ सिरप की खेप बरामद, अवैध नेटवर्क की जांच तेज
«Back
पर्वत पुरुष दशरथ मांझी का परिवार बदहाली में जीने को मजबूर ।
  • National
  • 2024-06-20 13:10:53
  • सैयद शादाब आलम

पर्वत पुरुष दशरथ मांझी का परिवार बदहाली में जीने को मजबूर ।

पर्वत पुरुष के नाम से विख्यात महापुरुष दशरथ मांझी का नाम तो इतिहास के पन्ने में दर्ज हो गया,साथ ही इनके नाम से अस्पताल,विद्यालय, महाविद्यालय,संग्रहालय इत्यादि भी बन गया परंतु सरकार की उदासीन रवैए के कारण इनके परिवार फटेहाल जीवन जीने के लिए मजबूर हैं।बिहार के गया जिला के गेहलौर निवासी थे पर्वत पुरुष दशरथ मांझी जिन्होंने पहाड़ को काट कर रास्ता बना डाला जिससे वजीरगंज की दूरी पांच किलोमीटर कम हो गया।

बाइस सालों में अकेले हथौड़ी और छेनी से पहाड़ को काट कर रास्ता बनाने वाले महापुरुष पर्वत पुरुष दशरथ मांझी ने सरकार से अपने लिए कुछ नहीं मांगा और न ही सरकार की नजर कभी इनके परिवार की ओर गई।1992 में इंदिरा आवास के बीस हजार रुपए से इनका एक कमरा बना है जो आज भी है और बाकी घर खपरैल और फूस का है।

पर्वत पुरुष के एक पुत्र और उनकी एक बेटी जो तीन बच्चों के साथ इसी घर में रहती है।लकड़ी पर खाना बनता है और नल जल का पानी उपयोग करती है।इनके बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं।अंशु  ने बताया कि आज सरकार की नजर इस परिवार पर होती तो ये लोग भी महल में रहते।

गेहलौर गांव में ही पर्वत पुरुष दशरथ मांझी के समाधि स्थल पर एक छोटा पार्क बनाया गया है जहां लोग दूर दूर से घूमने आते हैं परंतु यहां भी साफ सफाई के लिए कोई नियुक्त नही है और शौचालय तो बना है परंतु उसके संचालन की व्यवस्था नही है 


काश सरकार इस महापुरुष के परिवार पर थोड़ा भी ध्यान दे देती तो इनका परिवार भी एक अच्छा जीवन स्तर व्यतीत कर पाता।