« कटिहार में अंबेडकर जयंती पर एकजुटता की ताकत, भव्य शोभायात्रा से गूंजा संविधान बचाओ का नारा « बाबासाहेब के रास्ते पर चलकर ही बनेगा समरस समाज- सांसद तारिक अनवर « हिमंत बिस्वा सरमा के बयान पर भड़के पूर्व विधायक शकील अहमद खान, कहा– दलित समाज का अपमान बर्दाश्त नहीं « नरैहिया में डिग्री कॉलेज की मांग तेज, नहीं बना तो आंदोलन की चेतावनी सबहेड « कटिहार में 49 वर्षीय महिला रहस्यमय तरीके से लापता, परिजनों ने मुफस्सिल थाना में दिया आवेदन। « रोजीतपुर हाईवे पर भीषण सड़क हादसा: ट्रक-बाइक टक्कर में तीन युवकों की मौके पर मौत, चालक फरार « कटिहार कृषि विज्ञान केंद्र में दो दिवसीय कार्यशाला संपन्न, किसानों की आय बढ़ाने पर जोर « जाफरगंज में SBI संजीवनी परियोजना के तहत चला स्वच्छ भारत अभियान, ग्रामीणों ने लिया स्वच्छता का संकल्प « कटिहार के चार विद्यालयों में 400 बच्चों को मिला न्यूट्रिशन व हाइजिन किट, सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन भी लगाई गई « नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई: प्रतिबंधित कोरेक्स कफ सिरप की खेप बरामद, अवैध नेटवर्क की जांच तेज
«Back
हिमंत बिस्वा सरमा के बयान पर भड़के पूर्व विधायक शकील अहमद खान, कहा– दलित समाज का अपमान बर्दाश्त नहीं
  • Politics
  • 2026-04-09 16:40:30
  • सैयद शादाब आलम

हिमंत बिस्वा सरमा के बयान पर भड़के पूर्व विधायक शकील अहमद खान, कहा– दलित समाज का अपमान बर्दाश्त नहीं

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा वरिष्ठ दलित नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ कथित रूप से इस्तेमाल की गई भाषा को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। इस मुद्दे पर कदवा के पूर्व विधायक शकील अहमद खान ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे बेहद आपत्तिजनक और निंदनीय बताया है। उन्होंने कहा कि किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को इस प्रकार की भाषा का प्रयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह लोकतांत्रिक मर्यादा के खिलाफ है।


पूर्व विधायक शकील अहमद खान ने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे देश के वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं और दलित समाज की आवाज माने जाते हैं। ऐसे नेता के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करना केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे दलित समाज का अपमान है। उन्होंने कहा कि यह बयान करोड़ों अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समाज के सम्मान पर सीधा हमला है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।


शकील अहमद खान ने कहा कि राजनीति में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन भाषा और व्यवहार की एक सीमा होती है। किसी नेता के खिलाफ ऐसी भाषा का इस्तेमाल समाज में नफरत फैलाने का काम करता है और इससे सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचता है। उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को इस बयान पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए और भविष्य में ऐसी टिप्पणी से बचना चाहिए।


उन्होंने आगे कहा कि देश का संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार और सम्मान देता है, ऐसे में दलित समाज के खिलाफ अपमानजनक शब्द लोकतंत्र की आत्मा को चोट पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि अगर इस मामले पर कार्रवाई नहीं हुई तो यह गलत संदेश जाएगा और समाज में भेदभाव को बढ़ावा मिलेगा।


पूर्व विधायक ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से भी मांग की कि चुनावी माहौल में किसी भी नेता द्वारा नफरत फैलाने वाली भाषा पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि सामाजिक एकता बनी रहे।