« कटिहार में अंबेडकर जयंती पर एकजुटता की ताकत, भव्य शोभायात्रा से गूंजा संविधान बचाओ का नारा « बाबासाहेब के रास्ते पर चलकर ही बनेगा समरस समाज- सांसद तारिक अनवर « हिमंत बिस्वा सरमा के बयान पर भड़के पूर्व विधायक शकील अहमद खान, कहा– दलित समाज का अपमान बर्दाश्त नहीं « नरैहिया में डिग्री कॉलेज की मांग तेज, नहीं बना तो आंदोलन की चेतावनी सबहेड « कटिहार में 49 वर्षीय महिला रहस्यमय तरीके से लापता, परिजनों ने मुफस्सिल थाना में दिया आवेदन। « रोजीतपुर हाईवे पर भीषण सड़क हादसा: ट्रक-बाइक टक्कर में तीन युवकों की मौके पर मौत, चालक फरार « कटिहार कृषि विज्ञान केंद्र में दो दिवसीय कार्यशाला संपन्न, किसानों की आय बढ़ाने पर जोर « जाफरगंज में SBI संजीवनी परियोजना के तहत चला स्वच्छ भारत अभियान, ग्रामीणों ने लिया स्वच्छता का संकल्प « कटिहार के चार विद्यालयों में 400 बच्चों को मिला न्यूट्रिशन व हाइजिन किट, सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन भी लगाई गई « नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई: प्रतिबंधित कोरेक्स कफ सिरप की खेप बरामद, अवैध नेटवर्क की जांच तेज
«Back
10 मंज़िला इमारत से गिरकर कटिहार के मजदूर की मौत,गांव में छाया मातम  मुआवज़ा बढ़ाने और प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा पर उठी आवाज़
  • Latest News
  • 2025-11-28 18:57:21
  • सैयद शादाब आलम

10 मंज़िला इमारत से गिरकर कटिहार के मजदूर की मौत,गांव में छाया मातम मुआवज़ा बढ़ाने और प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा पर उठी आवाज़

कटिहार के बलरामपुर प्रखंड के धनहरा गांव  के  प्रवासी मजदूर 45 वर्षीय नजरुल आलम का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा। नजरुल आलम की मौत मुंबई के उड़न इलाके में एक 10 मंजिला इमारत पर मजदूरी करते वक्त पैर फिसलने से हो गई। घटना 25 नवंबर को हुई थी।


परिजनों के मुताबिक रोज़ की तरह नजरुल आलम ऊंची इमारत पर काम कर रहे थे कि अचानक संतुलन बिगड़ने से वे सीधे नीचे जा गिरे। मौके पर ही उनकी मौत हो गई। उनका शव गांव पहुंचते ही पूरा इलाका मातमी सन्नाटे में डूब गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मृतक अपने पीछे दो बेटे और दो बेटियां छोड़ गए हैं।


मृतक के घर पहुंचे माले विधायक दल के नेता सह पूर्व विधायक महबूब आलम ने गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बिहार और सीमांचल के लाखों मजदूर रोज़गार की तलाश में पंजाब, हरियाणा, गुजरात, जयपुर और मुंबई समेत बड़े शहरों में जाते हैं।

उन्होंने कहा—जो मजदूर बाहर जाकर जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं, सरकार को उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। जो प्रवासी मजदूर हादसे में जान गँवा देते हैं, उनके परिवार को सिर्फ ₹2 लाख की सहायता नाकाफी है। मुआवज़ा बढ़ाकर कम से कम ₹30 लाख किया जाना चाहिए।

महबूब आलम ने प्रवासी मजदूरों की सेफ्टी ऑडिट और निगरानी को भी अनिवार्य करने की मांग की।


स्थानीय निवासी मो. आरिफ ने भी सरकार से रोजगार उपलब्ध कराने की अपील की। उन्होंने कहा—हमेशा मजदूरों की मौत की खबर आती है। अगर सरकार स्थानीय स्तर पर उद्योग और रोजगार उपलब्ध कराए, तो मजदूरों को घर से दूर जाकर जोखिम भरा काम नहीं करना पड़ेगा।


नजरुल आलम की मौत से गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। परिजन अब सरकार से उचित मुआवज़ा और बच्चों के भविष्य की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।