विश्वविद्यालय प्रशासन पर छात्र नेता अंकित राज का तीखा हमला, छात्रों के हितों की अनदेखी का लगाया आरोप
विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर छात्र राजनीति में हलचल तेज हो गई है। छात्र नेता अंकित राज ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हालिया सीनेट बैठक और पारित बजट छात्रों के हित में पूरी तरह विफल साबित हुए हैं। उन्होंने इसे महज औपचारिकता करार देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की वास्तविक समस्याओं को नजरअंदाज कर रहा है, जिससे शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
अंकित राज ने कहा कि विश्वविद्यालय में सत्र विलंब एक गंभीर समस्या बन चुका है, जिससे हजारों छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि समय पर परीक्षा, परिणाम और प्रमाणपत्र जारी न होने से छात्र उच्च शिक्षा और रोजगार के अवसरों से वंचित हो रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने मार्कशीट की खराब गुणवत्ता और तकनीकी खामियों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय की लापरवाही को दर्शाता है।
उन्होंने गेस्ट फैकल्टी की बहाली प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए और कथित अवैध उगाही का आरोप लगाया। उनका कहना था कि पारदर्शिता के अभाव में नियुक्तियों में अनियमितताएं बढ़ रही हैं, जिससे योग्य शिक्षकों को अवसर नहीं मिल पा रहा है और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित होना पड़ रहा है।
छात्र नेता ने गरीब और पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए बीएड की पढ़ाई तथा छात्रावास जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी को भी गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने अब तक इन समस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस पहल नहीं की है, जबकि यह छात्रों के भविष्य से जुड़ा अहम प्रश्न है।
अंत में अंकित राज ने विश्वविद्यालय प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कुलपति ने अपनी उदासीनता नहीं छोड़ी और समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो छात्र जदयू इस मामले को माननीय मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री के समक्ष उठाएगी। उन्होंने प्रशासन से छात्रों के हित में ठोस कदम उठाने की मांग करते हुए कहा कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ, तो छात्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।




