मधुरा में मकीने गुंबद खजरा कॉन्फ्रेंस का हुआ आयोजन
कटिहार जिले के मधुरा गांव में शनिवार, 7 फरवरी को मकीने गुंबद खजरा कॉन्फ्रेंस का भव्य, अनुशासित और ऐतिहासिक आयोजन किया गया। यह इल्मी व रूहानी जलसा जामिया कादरिया रिज़विया मदरसा के तत्वावधान में तथा पूरे गांव के सामूहिक सहयोग से शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
इस कॉन्फ्रेंस का मुख्य उद्देश्य समाज में इल्म की रोशनी फैलाना, नैतिक मूल्यों को मज़बूत करना, अमन-ओ-भाईचारे को बढ़ावा देना और सामाजिक बुराइयों के ख़िलाफ़ जागरूकता पैदा करना रहा। जलसे में मौजूद उलेमा-ए-किराम ने अपने असरदार बयानात के ज़रिए लोगों को सच्चाई, इंसानियत और सब्र के रास्ते पर चलने की नसीहत दी।
“जहाँ इल्म की बात होती है, वहाँ अंधेरे टिक नहीं पाते,
जो सीख ले अदब-ए-ज़िंदगी, वही समाज को राह दिखाते।”
कार्यक्रम का सबसे यादगार और भावनात्मक क्षण मदरसे के बच्चों की दस्तारबंदी (पगड़ी-पोशी) रहा। इस अवसर पर दो बच्चों को कारी-ए-क़ुरआन बनने की दिशा में उनके प्रयासों के लिए दस्तार पहनाई गई। इस दृश्य ने न सिर्फ़ अभिभावकों बल्कि पूरे इलाके को गर्व और खुशी से भर दिया।
देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रसिद्ध उलेमा और शायरों ने अपनी शिरकत से जलसे को खास बना दिया। गुजरात से आए इंटरनेशनल शायर इस्लाम शब्बीर बरकाती, बिनोदपुर के मुफ्ती मोइनुद्दीन चतुर्वेदी, पटना के मुफ्ती हसन रज़ा नूरी, कोलकाता के मौलाना सैफुल्लाह अलिमी और भागलपुर के मशहूर शायर शम्श तबरेज़ भागलपुरी ने अपने बयान और शायरी से श्रोताओं को खूब प्रभावित किया।
इसके अलावा कटिहार जिला और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मक़ामी उलेमा, इमाम, हाफ़िज़-ए-क़ुरआन और शोअरा मौजूद रहे, जिन्होंने समाज को जोड़ने और सुधार की राह दिखाने वाला संदेश दिया।
“मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना,
इंसान है तो सीखे पहले इंसान बनना।”
आयोजन को लेकर पूरे मधुरा और आसपास के इलाकों में उत्साह का माहौल रहा। दूर-दराज़ से आए अकीदतमंदों की भारी भीड़ ने इस कॉन्फ्रेंस को ऐतिहासिक बना दिया। बेहतरीन व्यवस्था, अनुशासन और आपसी सहयोग के चलते कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा।
अंत में यह इल्मी और रूहानी जलसा दुआ, सलामती और अमन के पैग़ाम के साथ संपन्न हुआ, जिसमें समाज की भलाई, देश में शांति और आपसी भाईचारे के लिए विशेष दुआएं की गईं। आयोजन समिति ने सभी सहयोगियों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।
इस मौके पर मास्टर ख़ोबैब रजा,मुफ्ती तारिक रजा,मुफ्ती अजहर रजा,मौलाना मसऊद रजा,मौलाना अहसन रजा,मौलाना मेराज आलम, पैक्स अध्यक्ष मामून रशीद,पूर्व मुखिया जाकिर हुसैन,मुखिया प्रतिनिधि मिनहाज आलम,सरपंच प्रतिनिधि मतिउर रहमान,डॉक्डर मोहसिन रजा,फैजान आलम,मुहम्मद नजीर,अनवर आलम,मुहम्मद नसीम,अजाबुल हक,आरिफ दुकानदार,शौकत आलम,इश्तियाक आलम,मास्टर जाकिर हुसैन,मुहम्मद कलाम,मुहम्मद मुजफ्फर आलम,शोएब अख्तर,मुहम्मद बाबुल,मुहम्मद पप्पू के साथ साथ गांव के सैकड़ों लोगों की मेहनत और सहयोग ने इन बड़ा कॉन्फ्रेंस को कामयाब बनाने में अपनी मुख्य जिम्मेदारी निभाई,




