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2012 से जारी संघर्ष रंग लाया: युवा जद(यू) राष्ट्रीय सचिव मोहम्मद सलाउद्दीन की पहल पर जलकी मजार शरीफ का मेला राजकीय दर्जे की ओर
  • Politics
  • 2026-02-18 18:50:59
  • सैयद शादाब आलम

2012 से जारी संघर्ष रंग लाया: युवा जद(यू) राष्ट्रीय सचिव मोहम्मद सलाउद्दीन की पहल पर जलकी मजार शरीफ का मेला राजकीय दर्जे की ओर

कटिहार जिले के आजमनगर प्रखंड स्थित जलकी मजार शरीफ में सदियों से लगने वाले ऐतिहासिक और धार्मिक मेले को राजकीय मेला का दर्जा दिलाने की दिशा में निर्णायक प्रगति हुई है। इस उपलब्धि के पीछे युवा जद(यू) के राष्ट्रीय सचिव मोहम्मद सलाउद्दीन की वह निरंतर पहल है, जो वर्ष 2012 से लगातार इस मुद्दे को जनप्रतिनिधियों और सरकार के समक्ष मजबूती से उठाते आ रहे हैं।


मोहम्मद सलाउद्दीन ने जलकी मजार शरीफ के मेले के ऐतिहासिक, धार्मिक और सामाजिक महत्व को राज्य स्तर पर पहचान दिलाने के लिए वर्षों तक पत्राचार, जनसंपर्क और राजनीतिक प्रयास किए। उनके प्रयासों का ही परिणाम है कि यह विषय अब बिहार विधान मंडल तक पहुंचा और सरकार की ओर से इस पर आधिकारिक उत्तर सामने आया।


विधान परिषद सदस्य आफाक अहमद खान ने तारांकित प्रश्न संख्या 1/7212/730 के माध्यम से इस मुद्दे को सदन में उठाया। इसके जवाब में बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने लिखित रूप में बताया कि जलकी मजार शरीफ का मेला ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है तथा इसे राजकीय मेला घोषित करने की प्रक्रिया नियमानुसार अपनाई जा सकती है।


सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि कटिहार जिले के आजमनगर प्रखंड अंतर्गत जलकी ग्राम पंचायत में स्थित पीर बाबा सैयद शाह हुसैन की मजार, जिसे लंगोट बंद पीर बाबा के नाम से भी जाना जाता है, पर हर वर्ष वैशाख माह के प्रथम सप्ताह में विशाल मेला आयोजित होता है। इसमें बिहार सहित झारखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं, जो इसकी व्यापक लोकप्रियता और सामाजिक समरसता का प्रमाण है।


मंत्री ने स्पष्ट किया कि बिहार राज्य मेला प्राधिकरण अधिनियम, 2008 के तहत किसी भी महत्वपूर्ण मेले को राजकीय दर्जा देने के लिए जिला स्तर से विस्तृत प्रस्ताव आवश्यक है। प्रस्ताव प्राप्त होते ही सरकार नियमानुसार आगे की कार्रवाई करेगी।


इस पूरे घटनाक्रम को लेकर मोहम्मद सलाउद्दीन ने कहा कि यह सिर्फ एक मेले का सवाल नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और आपसी भाईचारे की पहचान है। उन्होंने विश्वास जताया कि शीघ्र ही जिला प्रशासन प्रस्ताव भेजेगा और जलकी मजार शरीफ का यह ऐतिहासिक मेला राजकीय पहचान प्राप्त करेगा।


सरकार के आधिकारिक उत्तर के बाद स्थानीय श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों में उत्साह है और सभी की निगाहें अब उस दिन पर टिकी हैं, जब मोहम्मद सलाउद्दीन का वर्षों पुराना सपना साकार होकर जलकी मजार शरीफ का मेला राज्य के प्रमुख राजकीय मेलों की सूची में शामिल होगा।